Friday, July 23, 2010

और मुझे प्यार हो गया


बात उन दिनो की है जब मैं कॉलेज में पढता था | मेरे साथ एक लडकी पढती थी जिसका नाम सोनाली था | मेरी काफी अच्छी दोस्त थी वह, मैं उसे प्या से सोनु कहके पुकारता था | हम दोनो आजु बाजु के बेंचेस पे बैठते थे | वो जो टीफीन लाती थी उसमे साथ लंच करते और कभी कभी साथ में ही पिरीयड बंक करते थे | वो हमारा साथ में कॉलेज का ५ वा साल था | फायनल ईयर..गॅदरिंग रखा हुआ था | हमारे कॉलेज की नं १ डान्सर मिस संगीता ने एक साँग पे डान्स बिठाया था | डान्स की थीम कुछ इस प्रकार थी की भगवान कृष्ण राधा के संग ज्यादा समय बिताते हैं और उसके प्रेम में भगवान अपनी पत्नी रुक्मिणी को भी भुल जाते हैं | तो रुक्मिणी उन्हे मनाने के लिये डान्स करती हैं | उस डान्स मे संगीता ने ( जो की हम दोनो की काफी अच्छी दोस्त थी ) रुक्मिणी का रोल खुद किया था, क्योंकी डान्स तो उसीको करना था | कृष्ण का रोल हमारे सिनीयर विजय को और राधा का रोल सोनु को दिया |


डान्स की प्रॅक्टिस होने लगी | मैं सोनु के साथ जाता और वापस आता | पर हमारे प्रॅक्टिस रुम अलग अलग थे | शुरु से ही मैं प्ले और मिमिक्री में इंटरेस्टेड होने के कारण डान्स पे कम ध्यान देता था | मैं अपने प्ले की प्रॅक्टिस करता अपने गृप के साथ और सोनु अपने डान्स की प्रॅक्टिस करती अपने गृप के साथ |
एक दिन मेरे प्ले के कुछ कलाकार ना आने के कारण मैंने अपने प्रॅक्टिस को छुट्टी दे दी और डान्स वाले रूम में प्रॅक्टिस देखने चला गया |
वहाँ संगीता, सोनु और विजय की डान्स की प्रॅक्टिस चल रही थी | कृष्ण के रोल में विजय और राधा के रोल में सोनु जो अक्टिंग कर रहे थे उसे देखकर पता नही क्यों मेरे दिल में कुछ अजीब सी फिलींग्स आने लगी | ना जाने क्यों इतना अच्छा डान्सर विजय, जो मेरा सबसे फेवरेट था, मुझे अच्छा नही लग रहा था | कुछ तो गडबड थी | पर क्या? समझ में नही आ रहा था |
उस दिन प्रॅक्टिस के बाद मैं कुछ खामोश खामोश सा था | कुछ खोया खोया सा... सोनु को यह बात काफी अखरी | उसने काफी पुछा की Ammu..whts wrng with u? पर जब मुझे ही पता नही था तो मैं क्या जवाब देता?
खैर...! उस दिन के बाद मैं रोज कुछ ना कुछ बहाना करके उनके प्रॅक्टिस रूम में जाने लगा | और दिन-ब-दिन मुझे विजय पे गुस्सा आने लगा | साला डन्स में इतनी overacting करने की क्या जरुरत हैं? सोनु को असली राधा समझकर डान्स करता हैं साला ! लगता हैं डोरे डाल रहा हैं उसपे ! ......पर विजय तो बुरा लडका नही था | मैं खुद भी विजय का बहुत बडा चहेता था डान्स में ! अगर वो सोनु को propose करता हैं और सोनु भी उसे हाँ करती हैं तो इसमें बुरा ही क्या हैं ?
दिमाग में उलटे सीधे सवाल घुमने लगे | जिनका जवाब ढुंढते ढुंढते मैं खुद परेशान होने लगा | क्या करु?.....समझ मे नही आ रहा था | हे भगवान...! मैं ऐसा क्या करु की विजय और सोनु की बढती नजदिकीया खत्म कर सकु ? पर मैं ऐसा क्यों करु ? मैं क्यों जल रहा हुं विजय से ? क्या सोनु भी विजय को चाहने लगी हैं? उफ्फ.....! मुझे कुछ ना कुछ तो करना ही पडेगा !
आखिर वो दिन निकला जिस दिन गॅदरिंग था | पुरे दिन मेरे दिमाग में उथल-पुथल मची हुई थी | दो तीन बार सोनु ने पुछा भी, क्या हुआ अम्मु? तबियत खराब हैं ? चलो डॉक्टर के पास...| पर मैं उसे कैसे समझाता की.............| उफ्फ्फ्फ...

एक एक प्रोग्राम होता चला गया | स्टेज पर हमारे प्ले का announcement हुआ | पर मेरा दिमाग ही काम नही कर रहा था | कई बार मैं अपने डायलॉग्ज भी भुल गया | नतीजा ये निकला की जो अमोल अपने प्लेज मिमिक्री के लिये जाना जाता था, उसका प्ले पुरा फ्लॉप हो गया | हे भगवान ! तुमने तो आज हमारी नाक ही काट दी अम्मु ! दोस्त कह रहे थे |
मैं क्या जवाब देता ? दिमाग में प्रॅक्टिस के दिनों की विजय और सोनु के डान्स की फिल्म flashback की तरह चल रही थी | मेरी आँखों ने कुछ और देखना नाकबुल किया था | जब दिमाग की परेशानी थकान बनके अपना कमाल दिखाने लगी तो अचानक एक चक्कर सा आ गया | अरे अरे ! ये क्या हुआ अम्मु को ? सब दोस्त चिल्ला उठे | जब मुझे एक अलग कमरे में लिटाया गया तो थोडी राहत महसूस हुई |
कमरे में लेटकर मैं सोचने की कोशीश कर रहा था की अचानक........दिमाग में एक घंटी सी बजी...yess...Ammu u love her... सोनु सिर्फ तुम्हारी दोस्त ही नही तुम्हारा प्यार हैं | हा हा हा तुम चाहते हो उसे...जान से भी ज्यादा..तभी तो उसे किसी दुसरे के साथ डान्स करते हुए भी देख नही सकते ! विजय के साथ jealousy का यही राज हैं | जाके कह दो उसे..की तुम उसे प्यार करते हो...जाओ...जल्दी...कही देर ना हो जाए...वरना वो किसी और की हो जायेगी...जाओ...जाओ...जल्दी....!
मै उठके स्टेज की तरफ भागा | पिछे मेरा दोस्त...जिसे मेरे साथ कमरे में रखा गया था | विंग में जाकर...वहाँ अपने डान्स के नंबर का इंतजार कर रहे लडके-लडकियों को मैं पुछने लगा....सोनु कहाँ हैं ? अरे कोई तो बताओ सोनु कहाँ हैं ? और....इतने में डान्स के लिये नाम अनाउन्स हुआ... Friends now we present dancer no 1 of our college Ms Sangita with her partners Ms Sonali and Mr Vijay ! ..
मेरे पाँव जहाँ थे वहीं जाम हो गये | आँखें स्टेज की तरफ....बी विंग से वे तीनों स्टेज पे आये | My God ! क्या दिख रही थी वो...! और वो उल्लु का पठ्ठा भी काफी हँडसम लग रहा था | एकदम राधा कृष्ण की जोडी लग रही थी | डान्स शुरु हो गया | उफ्फ्फ....तीनों अपने अपने पार्टस में जान फुंक रहे थे | उफ्फ्फ.... मेरा दिल बैठने लगा...गला भर आया..आँखों से आँसु निकल कर टप टप बहने लगे |
शायद मैं हार गया था | उन्हे वहाँ देखकर कोई भी नही कह सकता था की राधा कृष्ण की जोडी इससे अलग हो सकती हैं | डान्स खत्म हो गया...तालीयों की जोर्दार गडगडाहट मेरे दिल पर घुंसे बरसाने लगी | मैं थके कदमों से और रुंधे गले से विंग से निकलकर मेकअप रूम में गया |
मेकअप रूम में संगीता और सोनु अपना मेकअप उतार रहे थी | मेरा उतरा हुआ चेहरा देखकर संगीता ने पुछा, क्या हुआ अम्मु? सब ठीक तो हैं ना ? मेरी रुलाई भर आई | आँखों से आँसु ना निकले इसकी काफी कोशीश की पर आँसु भी बेवफा हो गये थे | क्या होगा संगीता? आज मैं हार गया...रुंधे गले से आवाज निकली | Don't worry Ammu ! आज तुम्हारी तबीयत ठीक नही थी इसलिए तुम प्ले में perform नही कर पाये | इसमें दिल पे लेनेवाली क्या बात हैं ? हँसते हुए संगीता बोली |
मैं इसलिए नही रो रहा हुं संगीता.....मैं सोनु से प्यार करता हुं...पर मैं पागल आज तक समझ नही पाया..की यही प्यार हैं...और आज जब समझ गया तब देर हो चुकी हैं...शायद सोनु किसी और को चाहने लगी हैं...मैं बेवकुफ का बेवकुफ ही रहा...कह भी नही पाया...और कहा तो तब, जब कोई फायदा नही...|

सोनु जो कब से मेरा आँसुओ से भरा चेहरा देख रही थी, अचानक मेरे सामने आयी और दोनो हाथों से मेरा गिरेबान पकडकर बोली...अम्मु ! अरे पागल...मैं तो कबसे तुम्हारे मुंह से यही सुनना चाहती थी....मैं तो हमेशा से तुम्हे प्यार करती थी पगले ! ...पर तुमने कभी भी मेरी feelings को समझा ही नही | मैं खुद तुमसे कहती तो तुम इसे सिर्फ दोस्ती का नाम दे देते ! क्योंकी तुम तो उस प्रिया पे मरते थे...| इसलिए संगीता और विजय ने मिलकर ये प्लान बनाया ताकी तुम्हे अहसास हो की तुम भी मुझसे प्यार करते हो....!
इतना कहकर वो मेरे कंधे पे सर रखकर रोने लगी | मेरा भी खुदपर काबु ना रहा | मैं भी रोने लगा ! पर अब ये आँसु गम के नही खुशी के थे | मैं अपना प्ले का अवार्ड जरुर हार गया पर मेरा प्यार जीत लिया था मैंने | और शायद ये आँसु जीत के थे | उसी आँसुओ भरी आँखोंसे मैंने देखा.....संगीता और विजय भी आँखोंमें नमी और होठों पे मुस्कान लिये....एक दुसरे की बाहों मे समा गये.... |

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