
बनकर मेरी
खुबसुरत सी चाहत,
बुँद बुँद कोई दिल में उतरी|
बेखबर सा अंजानी राहों पर,
राह में कोई पहलू से गुजरी|
ढलते सुरज की लेकर लालीमा सी,
ऑंखो में प्यारी सी तसबीर उभरी|
होकर ख्यालों सी,
दिल पे बरखा,
छाई बनकर,
कोई बहार की मयुरी|
लगकर एक,
आग सी दिल में,
खुशबु उसकी,
संदल सी बिखरी....|
वाह
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