Monday, December 28, 2009

खुबसुरत सी चाहत


बनकर मेरी

खुबसुरत सी चाहत,

बुँद बुँद कोई दिल में उतरी|

बेखबर सा अंजानी राहों पर,

राह में कोई पहलू से गुजरी|

ढलते सुरज की लेकर लालीमा सी,

ऑंखो में प्यारी सी तसबीर उभरी|

होकर ख्यालों सी,

दिल पे बरखा,

छाई बनकर,

कोई बहार की मयुरी|

लगकर एक,

आग सी दिल में,

खुशबु उसकी,

संदल सी बिखरी....|

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